FIIs & DIIs Investment: इस समय भारत के बाजार पर से विदेशी निवेशकों (FII/FPI) का भरोसा एकदम डगमगाता हुआ नजर आ रहा है। The Economic Times के हालिया खबर के मुताबिक, सितम्बर तिमाही Q2 FY26 के नतीजों से ये बात सामने निकल कर आई है कि, शेयर मार्केट में विदेशी निवेशक FIIs की हिस्सेदारी 15 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। मतलब बीजेपी मोदी के शासन काल में ही ये सब हुआ है। इस साल 2025 में विदेशी इन्वेस्टर्स ने भारतीय बाजार से लगभग 2 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं।
सितंबर तिमाही के आए नतीजों ने ये साफ कर दिया है कि, विदेशी निवेशक बड़े (Largecap) और मंझले (Midcap) दोनों ही भारत के बाजार से पैसा निकाल कर देश छोड़ रहे हैं।
₹2 लाख करोड़ की बिकवाली: 15 साल का सबसे निचला रिकॉर्ड!
मोदी सरकार के 2.O शासन काल में भारत में आने वाले विदेशी निवेश में भारी कमी आई है। खबर के मुताबिक, 2025 में हुई तगड़ी बिकवाली के बाद, NSE लिस्टेड कंपनियों में FPI की कुल हिस्सेदारी गिरकर सिर्फ़ 16.9% रह गई है। ये पिछले 15 सालों में सबसे निचला स्तर है। FIIs ने इस वित्त वर्ष FY26 के पहली छमाही में लगभग $8.7 बिलियन (लगभग 75.2 लाख करोड़ रुपए) का निवेश देश से बाहर निकाल लिया है। आंकड़े बताते हैं कि, ये बिकवाली मार्च 2023 से ही लगातार जारी थी।
FIIs ने कहाँ से निकाला पैसा और कहाँ जमा किया?
डेटा बताता है कि, विदेशी निवेशकों (FII/FPI) ने जिन सेक्टरों से सबसे ज्यादा पैसा निकाला है, उनमें टॉप पर इंडस्ट्रियल सेक्टर रहा। इसके बाद दूसरा सेक्टर कंज्यूमर स्टेपल्स (FMCG), एनर्जी (बिजली-तेल) और मटेरियल्स (कमोडिटी) है, जहां से सबसे ज्यादा पैसा निकाला गया। IT सेक्टर में भी उनका भरोसा थोड़ा कम हुआ है और वे सेक्टर को लेकर भी सतर्क हैं।
वही दो सेक्टर ऐसे रहे जहां पर उनका भरोसा कायम रहा और वे दो सेक्टर फाइनेंशियल सेक्टर और कम्युनिकेशन सर्विसेज (टेलीकॉम) सेक्टर है। इन दो सेक्टरों में उन्होंने अपना निवेश निवेश बढ़ाया है।
अब भारतीय निवेशक बन रहे हैं इंवेस्टमेंट किंग!
बाजार से जहां एक तरफ़ से विदेशी निवेशक भाग रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ से देश के म्यूचुअल फंड्स (DMFs) और बाक़ी भारतीय संस्थाएं (DIIs) धड़ाधड़ खरीदारी कर रहे हैं। घरेलू निवेशकों DMFs ने सितंबर तिमाही में ₹1.64 लाख करोड़ का बड़ा निवेश किया। यह 9वीं तिमाही है, जहां लगातार शानदार निवेश बढ़ा है। घरेलू निवेशकों DIIs का ये निवेश इतना पिछले 9वीं तिमाही में इतना बड़ा है कि, इसने 21 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारत के इतिहास में ये ऐसा पहली बार हुआ है कि, भारतीय संस्थागत निवेशकों (DIIs) की कुल हिस्सेदारी 18.7% हो गई है, जो विदेशी निवेशकों (FPIs) की हिस्सेदारी से कई ज़्यादा है। यह कारनामा 21 साल बाद हुआ है।
बता दें कि, हाल के समय में भारत के बाजार से विदेशी निवेशक डर के साए में है। लेकिन भारतीय निवेशक (DIIs) ने निवेश के मामले में हिम्मत नहीं मानी और अब भारत के बाज़ार की डोर देसी इन्वेस्टर्स के हाथ में आ गई है, जिन्होंने 21 साल बाद विदेशी इन्वेस्टर्स को पीछे छोड़ दिया है।
डिस्क्लेमर: यह लेख GreenEnergyShare.in पर निवेशकों को जानकारी देने के लिए है। किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है।
