Top 5 Green Energy Stocks: इक्विटी मास्टर ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में बताया गया है कि, देश के ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए सरकार की ओर से एक बुरी खबर आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो ग्रीन एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनियां सोलर (Solar) और पवन ऊर्जा (Wind Energy) के बड़े-बड़े ठेके पाकर ख़ुश थीं, अब उनका बुरा दौर शुरू होने वाला है। क्योंकि अब सरकार अगले दो साल (FY27 तक) के लिए ग्रीन एनर्जी के नए टेंडर (ठेके) की रफ़्तार धीमी करने की सोच रही है।
इसके पीछे की वजह ये है कि, अभी देश में हरित बिजली (Green Power) बन तो बहुत रही है, पर उसे इस्तेमाल करने की क्षमता अभी सरकार के पास नहीं हैं, यू कहे कि, उसे इस्तेमाल करने की क्षमता अभी कम है। ऐसे में यदी सरकार अब नए टेंडरों पर रोक लगाती है तो, इससे उन कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा, जिनका पूरा बिज़नेस सरकार के नए टेंडरों पर टिका है।
ऐसे में यदी सरकार नए टेंडरों पर रोक लगाने का फैसला लेती है तो, इससे देश की 5 बड़ी कंपनियां प्रभावित होंगी, इन 5 कंपनियों की सिर्फ कमाई ही प्रभावित नहीं होगी बल्कि इनके शेयर भी सरकारी फ़ैसले से सीधे प्रभावित हो सकते हैं:
यहाँ जानिए कौन सी हैं वो 5 बड़ी कंपनियां
1. SJVN Ltd. (सतलुज जल विद्युत निगम)
सरकार के फैसले से प्रभावित होने वाली 5 कंपनियों में से एक कंपनी SJVN Ltd. है। एसजेवीएन उन 4 सरकारी कंपनियों (CPSE) में से एक है, जो ख़ुद टेंडर जारी करती हैं। अगर टेंडर धीमी होंगे, तो इनका नया काम सीधा रुकेगा। बता दें कि, ये कंपनी पहले हाइड्रोपावर (पानी से बिजली) बनाती थी, पर अब कंपनी सोलर और पवन ऊर्जा में भी कूद गई है।
इसके कामकाज का हाल देखें तो, कंपनी की बिक्री पिछले 5 सालों में महज 3% सालाना आधार पर बढ़ी है, वही इसका मुनाफ़ा सालाना आधार 12% घटा है। कंपनी ने हाल ही में 12 गीगावाट (GW) की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता लगाने का बड़ा प्लान बनाया था। जिसपर एसजेवीएन करीब ₹75 अरब से ज़्यादा खर्च करने वाली है। लेकिन सरकार का फैसला टेंडर रोकने के पक्ष में आता है तो, इसके टेंडर धीमे होंगे जिससे इसका 12 गीगावाट (GW) की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता लगाने का प्लान अटक सकता है।
इससे न सिर्फ कंपनी और घाटे में चली जाएंगी बल्कि इसके शेयर में भी भविष्य में गिरावट देखने को मिल सकती है।
2. NTPC Green Energy
सरकारी नवरत्न कंपनी NTPC की सहायक कंपनी एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी भी इससे प्रभावित होगी। ये भी उन 4 सरकारी कंपनियों में शामिल है जो टेंडर जारी करती हैं। टेंडर धीमे हुए तो इसकी भी लंका लगेगी।
हाल ही में कंपनी ने गुजरात में 10 GW सोलर और 5 GW पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए MoU साइन किया है और इसका ग्राहक आधार भी SECI, NTPC, और Indian Railways जैसे बड़े नामों से मज़बूत है। कंपनी का काम इतना जोरो से चल रहा है कि, कंपनी की पिछले साल बिक्री 13% बढ़ी थी और मुनाफ़ा 38% बढ़ा था।
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3. Sterling & Wilson Solar
शायद आपको इसके बारे में मालूम नहीं होगा कि, दिग्गज कंपनी स्टर्लिंग एंड विल्सन सोलर कंपनी Reliance Industries के समर्थन से चलती है। बता दें कि, ये कंपनी जो भी प्रोजेक्ट हाथ में लेती है, वह प्रोजेक्ट कंपनी ठेका लेने से लेकर पूरा करने तक का पूरा काम करती है।
कंपनी ने कहा था कि, FY26 की दूसरी छमाही में उनके पास 17 GW से ज़्यादा के नए ऑर्डर आने की उम्मीद है। ऐसे में यदि सरकार नए टेंडर रोक देती है तो कंपनी के इन उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।
स्टर्लिंग एंड विल्सन सोलर पहले ही चार साल तक घाटे का सामना कर चुकी है और अब बहुत मुश्किल से FY25 में मुनाफ़े में आई है। अब ऐसे में सरकार नए टेंडरों पर रोक लगाती है तो, कंपनी दुबारा घाटे में जा सकती है।
4. Waaree Renewable Tech
ठेकेदारी के काम में माहिर ग्रीन एनर्जी कंपनी वारी रिन्यूएबल भी एक और ऐसी कंपनी हैं जो, टेंडरों पर रोक लगने पर दिक्कत का सामना कर सकती है। क्योंकि कंपनी की 98% EPC से ही आती है। साथ ही, यह सरकारी सोलर टेंडरों पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
सरकार से मिले टेंडरों के चलते ही वारी रिन्यूएबल की बिक्री पिछले 3 सालों में 114% और शुद्ध मुनाफ़ा 195% सालाना बढ़ा है। इसके अलावा कंपनी रिटर्न रेशियो (ROE और ROCE) भी बहुत मज़बूत हैं।
अब यदी सरकार टेंडरों में रुकावट पैदा कर दे तो इसका असर कंपनी के कमाई पर पक्का पड़ने वाला है।
5. Inox Wind
हवा से बिजली बनाने के लिए जरूरी विंड टरबाइन बनाने वाली दिग्गज कंपनी इनॉक्स विंड एक प्रमुख कंपनी है जो इस फैसले से प्रभावित होगी। क्योंकि इसके कई बड़े ग्राहक सीधे सरकारी कंपनियां (PSUs) हैं। कंपनी के पास जो 4 GW से ज़्यादा का ऑर्डर बुक है उसमें से बड़ा हिस्सा सरकारी कंपनियों से आता है।जिसमें NTPC, CESC जैसे बड़े ग्राहकों के ऑर्डर शामिल हैं। अब ऐसे में सरकार नए टेंडरों को रोकने का फैसला करती है तो, कंपनी को सरकारी ग्राहकों से नए टेंडर मिलना बंद हो जाएंगे। यदि सरकार के टेंडर रद्द हुए या धीमे हुए, तो कंपनी के कारोबार पर असर दिखेगा। जिससे इसके शेयर भी प्रभावित होंगे।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बात
भारत ने अब तक 209 GW हरित बिजली बनाने का बड़ा काम कर लिया है। लेकिन उसका इस्तेमाल करने के लिए उसे घरों तक, फैक्ट्रियों तक पहुंचाने के लिए सरकार के पास जरूरी क्षमता न होने के कारण सरकार अब नए टेंडरों को धीमा करने पर सोच रही है। ऐसे यदि सरकार अपनी नीतियों को बदल कर नए टेंडरों को धीमा करती है, तो इससे इन कंपनियों की कमाई और शेयरों के दाम दोनों प्रभावित होंगे।
ऐसे में जो भी निवेशक इन पांच कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, उन्हें अभी सरकार के फैसले का इंतजार करना चाहिए। साथ ही इन कंपनियों के कर्ज़, कामकाज की क्षमता, और प्रबंधन की भी जांच ज़रूर करनी चाहिए, क्योंकि सरकारी नीतियों में बदलाव से इनके शेयरों में गिरावट आ सकती है। जिससे निवेशकों को घाटा हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख GreenEnergyShare.in पर निवेशकों को जानकारी देने के लिए है। किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है।
